अप्रशिक्षित शिक्षकों को प्रशिक्षण देने की मांग हाई कोर्ट ने खारिज की

अप्रशिक्षित सहायक अध्यापकों को प्रशिक्षण दिलाए जाने की मांग को लेकर दाखिल याचिका इलाहबाद हाईकोर्ट ने खारिज कर दी है। कोर्ट ने का कहा कि प्रशिक्षण देने के लिए अधिकृत संस्था एनआईओएस में अधिकांश शिक्षक (1.72 लाख लगभग) ऑनलाइन पंजीकृत हो चुके हैं। ऐसे में अब हस्तक्षेप करने का कोई औचित्य नहीं है। यदि कोई शिक्षक पंजीकरण से वंचित है तो वह व्यक्तिगत रूप से कोर्ट आ सकता है। याचिका बेसिक शिक्षक संघ की ओर से दाखिल की गई थी। इस पर मुख्य न्यायमूर्ति डीबी भोसले और न्यायमूर्ति सुनीत कुमार की पीठ ने सुनवाई की।
संघ का कहना था कि केंद्र सरकार ने 31 मार्च 2019 तक प्राथमिक विद्यालयों में पढ़ा रहे सभी अप्रशिक्षित अध्यापकों को प्रशिक्षण देकर प्रशिक्षित कर देने का निर्देश दिया है। इसके बाद कोई भी अप्रशिक्षित अध्यापक बच्चों को नहीं पढ़ाएगा। इस आदेश की वजह से बहुत से अप्रशिक्षित अध्यापकों को नौकरी गंवानी पड़ेगी, क्योंकि राज्य सरकार ने बहुत से विद्यालयों के प्रधानाध्यापकों को प्रशिक्षण की सूचना नहीं दी है। हजारों अध्यापक एनआईओएस में पंजीकरण कराने से वंचित रह गए हैं। याचिका का विरोध करते हुए अपर मुख्य स्थायी अधिवक्ता रामानंद पांडेय ने कहा कि एक लाख 72 हजार शिक्षक अब तक ऑनलाइन पंजीकरण करा चुके हैं। 19 हजार अध्यापकों ने अब तक पंजीकरण नहीं कराया है। पंजीकृत शिक्षकों को दूरस्थ माध्यम से प्रशिक्षण दिया जाएगा। अब पंजीकरण कराने की समयसीमा बीत चुकी है। इसे केंद्र सरकार ही बढ़ा सकती है। कोर्ट ने याचिका में हस्तक्षेप करने से इंकार करते हुए इसे खारिज कर दिया है।

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